कुरान - 17:46 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَجَعَلۡنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ أَكِنَّةً أَن يَفۡقَهُوهُ وَفِيٓ ءَاذَانِهِمۡ وَقۡرٗاۚ وَإِذَا ذَكَرۡتَ رَبَّكَ فِي ٱلۡقُرۡءَانِ وَحۡدَهُۥ وَلَّوۡاْ عَلَىٰٓ أَدۡبَٰرِهِمۡ نُفُورٗا

Transliteration: (Wa ja'alnaa 'alaa quloo bihim akinnatan any yafqahoohu wa feee aazaanihim waqraa; wa izaa zakarta Rabbaka fil Quraani wahdahoo wallaw 'alaaa adbaarihim nufooraa)

और हमने उनके दिलों पर पर्दे डाल दिए हैं कि वे इसे समझ न सकें, और उनके कानों में भारीपन (बहरापन) कर दिया है; और जब आप क़ुरआन में अपने अकेले रब की चर्चा करते हैं, तो वे नफ़रत से अपनी पीठ फेर कर भाग खड़े होते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 46 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] केवल एक अल्लाह के ज़िक्र से मुश्रिकों की चिढ़

मुश्रिक अपने बुतों और झूठे पीरों की तारीफ़ सुनकर ख़ुश होते थे, मगर जब ख़ालिस तौहीद (ला इलाहा इल्लल्लाह) की बात की जाती तो वे गुस्से और नफ़रत से मुंह फेर कर भाग जाते थे।

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