कुरान - 17:89 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

89
وَلَقَدۡ صَرَّفۡنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٖ فَأَبَىٰٓ أَكۡثَرُ ٱلنَّاسِ إِلَّا كُفُورٗا

Transliteration: (Wa laqad sarrafnaa linnaasi fee haazal quraani min kulli masalin fa abaaa aksarun naasi illaa kufooraa)

और यक़ीनन हमने लोगों के लिए इस क़ुरआन में हर तरह की मिसालें तरह-तरह से बयान कर दी हैं, मगर अक्सर लोगों ने सिवाय कुफ़्र और नाशुक्रगुज़ारी के कुछ क़ुबूल न किया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 89 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 89

✅ क़ुरआन की रोशन दलीलें और हक़ से मुंकरों की ज़िद

अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में तौहीद, आख़िरत और नेकी के पैग़ाम को समझाने के लिए हर तरह की दलीलें, मिसालें और पिछली क़ौमों के वाक़िआत खोल-खोलकर बयान फ़रमाए हैं। इसके बावजूद हक़ के दुश्मनों ने अपनी हठधर्मी और तकब्बुर के बाइस इसे झुठलाने में ही अपनी ज़िद रखी।

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