कुरान - 17:88 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

88
قُل لَّئِنِ ٱجۡتَمَعَتِ ٱلۡإِنسُ وَٱلۡجِنُّ عَلَىٰٓ أَن يَأۡتُواْ بِمِثۡلِ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانِ لَا يَأۡتُونَ بِمِثۡلِهِۦ وَلَوۡ كَانَ بَعۡضُهُمۡ لِبَعۡضٖ ظَهِيرٗا

Transliteration: (Qul la'inij tama'atil insu waljinnu 'alaaa any ya'too bimisli haazal quraani laa ya'toona bimislihee wa law kaana ba'duhum liba 'din zaheeraa)

कह दीजिए कि 'अगर तमाम इंसान और जिन्नात इस बात पर मुत्तफ़िक़ (एकजुट) हो जाएं कि इस क़ुरआन जैसा कलाम बनाकर लाएं, तो वे इस जैसा नहीं ला सकेंगे, चाहे वे एक-दूसरे के मददगार ही क्यों न बन जाएं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 88 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 88

✅ क़ुरआन का अज़ीम चैलेंज: दुनिया की कोई ताक़त इस जैसा कलाम नहीं ला सकती

यह आयत क़ुरआन मजीद के मौजिज़ा (अद्वितीय) होने का खुला चैलेंज है। तमाम इंसानों और जिन्नात के बड़े-बड़े अदीब, फ़सीह और अक़्लमंद मिलकर भी क़ुरआन जैसी एक सूरत या कलाम पेश करने से आजिज़ (बेबस) हैं। क़ुरआन का फ़साहत व बलाग़त, हिकमत और इल्म इंसानी बसात से बहुत बुलंद है क्योंकि यह ख़ालिक़े कायनात का कलाम है।

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