कुरान - 109:4 सूरह अल-काफ़िरून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٞ مَّا عَبَدتُّمۡ

Transliteration: (Wa laaa ana 'abidum maa 'abattum )

4.और मैं कभी भी उस चीज़ की पूजा नहीं करूंगा जिसकी तुम पूजा करते हो [5] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-काफ़िरून आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

5.सूरह का संदेश का व्याख्या (Explanation of the Surah's Message):

सच्चे धर्म की अनजानी (Unawareness of the True Religion):
कुछ लोग सच्चे धर्म से अनजान होते हुए भटक जाते हैं। हालांकि, पवित्र पैग़ंबर ﷺ जन्म से ही सत्य (truth) से पूरी तरह अवगत (aware) थे।

नीच आत्मा (नफ्स ए अम्मारा) द्वारा गुमराही (Misguidance of the Baser Self (Nafs e Ammarah)):
नीच आत्मा, जो बुराई की ओर झुकती है, एक व्यक्ति को भटका सकती है। पवित्र पैग़ंबर ﷺ ऐसी प्रवृत्तियों (inclinations) से मुक्त थे।

शैतान द्वारा गुमराही (Misguidance of the Devil):
शैतान कई लोगों को गुमराह करता है, लेकिन पवित्र पैग़ंबर ﷺ शैतान के प्रभाव (influence) से सुरक्षित थे।

बुरी संगति के कारण गुमराही (Misguidance Due to Evil Company):
बुरी संगति (evil company) एक व्यक्ति को भटका सकती है। हालांकि, पवित्र पैग़ंबर ﷺ हमेशा अल्लाह की दिव्य उपस्थिति (Divine presence) से घिरे रहते थे और उनका चरित्र (character) अल्लाह की हिदायत के रंगों (colors) से गहरा रंगा हुआ था। इसलिए, उनके लिए गुमराही का कोई सवाल ही नहीं था।

मुख्य शिक्षाएँ (Key Lessons):

धार्मिक मामलों में सख्ती (Strictness in Religious Matters):
दुनियावी मामलों में एक व्यक्ति लचीलापन (leniency) अपना सकता है, लेकिन धार्मिक मामलों में एक व्यक्ति को दृढ़ और सख्त (firm and strict) होना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि अविश्वासी (infidels) हताश हो जाएं और एक मुसलमान के विश्वास (faith) से समझौते की कोई उम्मीद (hope) न रखें (Tafseer Roohul Bayaan)।

पवित्र पैग़ंबर ﷺ के भविष्य में यकीन (Certainty in the Holy Prophet’s Future):
पवित्र पैग़ंबर ﷺ अपने भविष्य से पूरी तरह अवगत (aware) थे और वे निश्चित (certain) थे कि वे कभी भी कुफ्र (infidelity), शरीक (polytheism) या किसी प्रकार की उन्नति (transgression) में नहीं लिप्त (indulge) होंगे। उनका इस बारे में अवगत (awareness) और इन बुराईयों (evils) से सुरक्षित रहना (protection) दिव्य योजना (Divine plan) का हिस्सा था।

अविश्वासियों को हताश करना (Making the Infidels Despondent):
एक मुसलमान को अपने विश्वास में इतनी दृढ़ता (steadfastness) दिखानी चाहिए कि अविश्वासी (infidels) उन्हें गुमराह करने की कोई उम्मीद (hope) न रखें। यह इस्लाम के सत्य (truth) के प्रति एक मजबूत (strong) प्रतिबद्धता (commitment) को दर्शाता है, जो यह दिखाता है कि विश्वास (faith) के मामलों में कोई समझौता (compromise) संभव नहीं है।

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