कुरान - 92:7 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلۡيُسۡرَىٰ

Transliteration: (Fasanu yassiruhoo lilyusraa)

7.हम उसे आसानी (सहजता) की राह प्रदान करेंगे। [5] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

हम उसे आसान करेंगे
(We Shall Provide Him With Ease)

हज़रत अबू बकर सिद्धीक की श्रद्धा
(Hazrat Abu Bakr Siddique’s Devotion)
हज़रत अबू बकर सिद्धीक (रज़ी अल्लाहु अन्हु), जिन्होंने अपनी पूरी दौलत को ग़ुलामों की आज़ादी के लिए खर्च किया और अपनी ज़िन्दगी के शुरुआत से ही तज़किया (purification) और परहेज़गारी (piety) का प्रतीक बने, उन्हें अल्लाह तआला द्वारा आसानी का वादा किया गया।
उनकी पक्का इमान (strong faith) और हर एक शब्द और कार्य को, जो हज़रत मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) ने किया, अपने कर्म, शब्द और दिल से स्वीकार करना, उन्हें दुनिया, मौत, क़ब्र (grave) और क़ियामत (Day of Judgement) के दिन आराम का हक़दार बनाता है।
हज़रत अबू बकर सिद्धीक के ज़रिए, हज़रत मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) की मौत के बाद इस्लाम (Islam) और ईमानदारों (believers) की मुसीबतें (hardships) हल हुईं।

परहेज़गारों के लिए आसानियां
(Ease for the Righteous)
यह आयत (verse) सिर्फ हज़रत अबू बकर सिद्धीक तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर इंसान (person) को शामिल करती है जो:

  • अपनी दौलत या नेक काम सही जगह पर बिना दिखावे, तंज़ (mocking) या दूसरों को नुकसान (harm) पहुँचाए दे।
  • इमानदार (honest) होकर सभी आस्थाओं (articles of faith) को स्वीकार करता है।
    ऐसे लोग हर चरण (stage) में आसानी के वादे से नवाजे जाते हैं, चाहे वह इस दुनिया (world) में हो, मौत के समय हो, क़ब्र में हो या आख़िरत (Hereafter) में।

दौलत से परे दान
(Charity Beyond Wealth)
आयत में "दी" शब्द का खुला होना यह दर्शाता है कि दान (charity) सिर्फ दौलत (wealth) तक सीमित नहीं है।
दान deeds (काम), kindness (दया), और कोशिशों (efforts) के रूप में भी हो सकता है, जिससे यह आयत अमीरों (rich) और गरीबों (poor) दोनों पर लागू होती है।

आयत का व्यापक स्वरूप
(Comprehensive Nature of the Verse)
यह आयत इस सार्वभौमिक (universal) सिद्धांत (principle) को संक्षेप में प्रस्तुत करती है कि सच्ची श्रद्धा (true devotion) और उदारता (generosity), चाहे वह दौलत हो या कार्य (actions), इस ज़िन्दगी (life) और आख़िरत में ईश्वर की आसानी (ease) का रास्ता खोलती है। यह एक याद दिलाने के रूप में है कि अल्लाह (Allah) की रहमत (mercy) और इनाम (reward) उन लोगों के लिए अनंत (endless) हैं जो निस्वार्थ (selfless) कार्य करते हैं और अडिग (steadfast) इमान (faith) रखते हैं।

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