कुरान - 92:8 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
وَأَمَّا مَنۢ بَخِلَ وَٱسۡتَغۡنَىٰ

Transliteration: (Wa ammaa man bakhila wastaghnaa )

8.लेकिन वह (व्यक्ति) जिसने कंजूसी [6] की और बेपरवाही बरती। [7] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

और वे जो कंजूस हो गए और आत्मनिर्भर बन गए
(And Those Who Become Misers and Independent)

कंजूसों जैसे उम्मयाह बिन खलफ
(Misers Like Umayyah bin Khalaf)
उम्मयाह बिन खलफ को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पहचाना जाता है, जिन्होंने अपना धन इस्लाम के खिलाफ खर्च किया।
धन को हराम (forbidden) या नुक्सान (harmful) वाले कारणों पर खर्च करना, कंजूसी (miserliness) का सबसे खराब रूप है। यह संसाधनों का दुरुपयोग (misuse) है, जो अन्यथा righteous (धर्मिक) और रचनात्मक (constructive) उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता था।

आत्मनिर्भरता का भ्रम
(Self-Perceived Independence)
उम्मयाह बिन खलफ ने खुद को आत्मनिर्भर (self-sufficient) समझा और हज़रत मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) या ईश्वरीय हिदायत (divine guidance) की कोई ज़रूरत नहीं मानी।
यह रवैया (attitude) घमंड (arrogance) और अविश्वासियों (infidels) का रास्ता (path) माना जाता है।

हज़रत अबू बकर सिद्धीक का दृष्टिकोण
(Dependency on the Holy Prophet)
हज़रत अबू बकर सिद्धीक (रज़ी अल्लाहु अन्हु) का विपरीत दृष्टिकोण आदर्श (ideal) मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने हमेशा हज़रत मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) पर निर्भरता (dependence) को स्वीकार किया।
यहां तक कि पवित्र काबा (Sacred Ka'bah) को भी हज़रत मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) पर निर्भर माना जाता है।

  • क़िबला (Qibla) को हज़रत मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) को प्रसन्न करने के लिए स्थापित किया गया था।
  • उनके प्रयासों (efforts) से यह मूर्तियों से मुक्त (purified) किया गया था।

सीखे गए पाठ
(Lessons Learned)

सच्ची उदारता
(True Generosity)
धन को हराम या विनाशकारी (destructive) उद्देश्यों पर खर्च करना कंजूसी (miserliness) नहीं बल्कि सही मायने में एक गलती है। सच्ची उदारता (generosity) तो धन और संसाधनों का उपयोग अच्छे कामों और समाज के भले के लिए करना है।

ईश्वरीय मार्गदर्शन पर निर्भरता
(Dependence on Prophetic Guidance)
धर्मिक मार्ग (righteous path) यह है कि वे हज़रत मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) से आत्मिक मार्गदर्शन (spiritual guidance) और ईश्वरीय रहमत (divine mercy) के लिए अपनी निर्भरता को स्वीकार करते हैं।

घमंड और अहंकार
(Pride and Arrogance)
ईश्वरीय मार्गदर्शन से आत्मनिर्भरता का भ्रम (illusion) नाश (ruin) की ओर ले जाता है, जैसा कि उम्मयाह बिन खलफ के कार्यों से दिखाया गया है।
यह आयत (verse) धर्मिकों (righteous) और अपराधियों (transgressors) के बीच के अंतर को रेखांकित करती है, जिसमें विनम्रता (humility), उदारता (generosity), और पैगंबर (prophetic) मार्गदर्शन का पालन (adherence) मुख्य गुण (key virtues) के रूप में दर्शाए गए हैं।

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