कुरान - 92:1 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
وَٱلَّيۡلِ إِذَا يَغۡشَىٰ

Transliteration: (Wallaili izaa yaghshaa )

1.और रात की क़सम, जब वह (हर चीज़ को) ढक लेती है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

रात की कसमें और उसके महत्व का पृष्ठभूमि (Background of Revelation: "By the Night When It Overcomes")

यह सूरह उस महान कार्य की पृष्ठभूमि में उतरी जो हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ीअल्लाहु अन्हु) ने अंजाम दिया था। उन्होंने हज़रत बिलाल (रज़ीअल्लाहु अन्हु) को उमय्या बिन खल्फ जैसे क्रूर यहूदी के अत्याचार से मुक्त कराया। हज़रत अबू बक्र ने बड़ी रकम चुकाई ताकि हज़रत बिलाल को आज़ाद किया जा सके और उन्हें ज़ुल्म से राहत मिल सके।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ीअल्लाहु अन्हु) ने सात ग़ुलामों को आज़ाद किया, जिनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल थे। ये सभी सच्चे ईमान वाले थे जो काफ़िरों के हाथों गंभीर उत्पीड़न सह रहे थे। इन में से हज़रत बिलाल और हज़रत मालिक बिन फहेरा (रज़ीअल्लाहु अन्हुमा) खास तौर पर उल्लेखनीय हैं, जो न केवल महान संत थे बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत ऊंचे दर्जे पर थे।

हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ के इस्लामी योगदान (Contributions of Hazrat Abu Bakr Siddique)

हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ीअल्लाहु अन्हु) का प्रारंभिक इस्लामी समुदाय में योगदान अतुलनीय था। उदाहरण के लिए:

मस्जिद-ए-नबवी की भूमि का क्रय (Purchase of Land for Masjid-e-Nabawi):
उन्होंने मस्जिद-ए-नबवी (पैग़म्बर की मस्जिद) के लिए ज़मीन की खरीद के लिए धन दिया।

इस्लाम के लिए बड़ा आर्थिक बलिदान (Major Financial Sacrifice for Islam):
उन्होंने इस्लाम और पैग़म्बर मुहम्मद (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) की सहायता के लिए चालीस हज़ार अशर्फ़ियां (सोने के सिक्के) खर्च किए।

सादगीपूर्ण जीवनशैली (A Life of Simplicity):
अपनी संपत्ति और उदारता के बावजूद, उन्होंने सादगीपूर्ण जीवन जिया। उन्होंने अपने हाथों से सिले हुए कपड़े पहने और इस्लामी उद्देश्य के लिए अपनी व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को त्याग दिया।

शिक्षाएं (Lessons)

हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ीअल्लाहु अन्हु) के कार्य न केवल उनकी ईमानदारी और निष्ठा को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी सिखाते हैं कि इस्लाम की सेवा में धन, समय और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं की कुर्बानी का क्या महत्व है। उनकी जीवनशैली और सेवाएं इस्लाम के लिए उनके असीम समर्पण का प्रमाण हैं।

(संदर्भ: तफ़सीर अज़ीज़ी)

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