कुरान - 92:3 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
وَمَا خَلَقَ ٱلذَّكَرَ وَٱلۡأُنثَىٰٓ

Transliteration: (Wa maa khalaqaz zakara wal unthaa )

3.और उस की क़सम जिसने नर और मादा को पैदा किया। [2] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

क़सम उस खालिक की जो मर्द और औरत को पैदा करता है
(The Oath on the Creator of Male and Female)

ख़ालिक की खासियत
(The Creator’s Uniqueness)
हालाँकि सृजन दो हिस्सों में है, यानी मर्द और औरत, मगर अल्लाह तआला इन दोनों से ऊपर हैं। ख़ालिक बेमिसाल और सृजन से जुड़े किसी भी दायरे या सिफ़त से पाक हैं।

जैविक भेद और इंटरसेक्स लोग
(Biological Diversity and Hermaphrodites)
आधुनिक साइंस ये मानती है कि इंटरसेक्स (हर्माफ्रॉडाइट) लोग होते हैं, जिनमें मर्द और औरत की पारंपरिक परिभाषाओं के मुताबिक़ ख़ुसूसियतें नहीं होतीं। लेकिन ये भिन्नताएँ जैविक लिंग विभेदन के बड़े ढांचे में समझी जाती हैं। इंटरसेक्स हालात प्राकृतिक होते हैं और ये तीसरी जेंडर का इशारा नहीं करते, बल्कि दो जेंडरों के अंदर भिन्नताएँ होती हैं। इसी तरह, म्यूल जैसे संकर जीव जैविक रूप से मर्द या औरत होते हैं, हालांकि वे प्रजनन में असमर्थ होते हैं।

सृष्टि का तंत्र
(The Order of Creation)
यह आयत यह बताती है कि सृष्टि का तंत्र दो लिंगों—मर्द और औरत—के ज़रिए चलता है, जो ज़िन्दगी की निरंतरता में एक दूसरे के पूरक होते हैं। जबकि आजकल लिंग पहचान और अभिव्यक्ति पर चर्चाएँ बढ़ रही हैं, जैविक आधार अभी भी इन दो लिंगों में ही समाहित है।

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