कुरान - 92:21 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَلَسَوۡفَ يَرۡضَىٰ

Transliteration: (Wa lasawfa yardaa)

21. और जल्दी ही वह उससे राज़ी हो जाएगा। [20] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफसीर (Tafsir) - "और जल्द ही वह उनसे खुश होगा"
(Commentary of the Verse: "And Soon He Will Be Well-Pleased with Him")

आयत का अर्थ (Explanation of the Verse):

यह आयत हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (RA) के भविष्य में अल्लाह के दिव्य रज़ा (खुशी) के बारे में बताती है। यह स्पष्ट करती है कि जल्द ही, अल्लाह तआला हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (RA) से अपनी अत्यधिक खुशी और संतोष व्यक्त करेंगे, जो सृष्टि के सामने जाहिर होगा। इस आयत का यह मतलब नहीं है कि अल्लाह कभी हज़रत अबू बकर (RA) से नाराज़ थे, बल्कि यह आयत इस बात की ओर इशारा करती है कि हज़रत अबू बकर (RA) को आख़िरत में एक उच्च स्थान मिलेगा, और वह अल्लाह के प्यारे नबी ﷺ के पास जन्नत में होंगे।

आयत से जुड़ी मुख्य बातें (Key Issues Arising from the Verse):

अल्लाह की हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (RA) के प्रति अनंत खुशी (Allah’s Eternal Pleasure for Hazrat Abu Bakr Siddique):
यह आयत पुष्टि करती है कि अल्लाह कभी भी हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (RA) से नाराज़ नहीं थे। बल्कि यह आयत यह बताती है कि अल्लाह जल्द ही अपनी रज़ा को जाहिर करेंगे, जो सृष्टि के सामने स्पष्ट होगा। हज़रत अबू बकर (RA) का उच्च स्थान है, और अल्लाह का संतोष उनकी ज़िन्दगी और उसके बाद भी जारी रहेगा। यह आयत हज़रत अबू बकर (RA) को विशेष सम्मान और सर्वोत्तम इनाम का वादा करती है, जो क़ियामत के दिन और जन्नत में नबी ﷺ के पास निकटता के रूप में होगा।

अल्लाह की अनंत कृपा और हज़रत अबू बकर (RA) की भविष्य की संतुष्टि (Allah's Infinite Bounty and Hazrat Abu Bakr's (RA) Future Contentment):
एक और व्याख्या यह है कि यह आयत बताती है कि हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (RA) जल्द ही इतनी बड़ी दिव्य कृपा से नवाजे जाएंगे कि वह पूरी तरह से अपने रब से संतुष्ट हो जाएंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि हज़रत अबू बकर (RA) वर्तमान में असंतुष्ट थे, क्योंकि वह हमेशा ही अल्लाह की तय की हुई बातें और फैसलों से संतुष्ट रहे हैं। यह आयत इस बात की गवाही देती है कि अल्लाह की कृपाएं उन पर उमड़ने वाली हैं, जो उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट करेंगी। यह विचार सुरह अश-शरह (93:5) की आयत से मेल खाता है, जिसमें अल्लाह अपने प्रिय बंदों को भरपूर कृपा देने का वादा करते हैं, जैसे हज़रत अबू बकर (RA) को।

नबी ﷺ के साथ अल्लाह का वादा (Parallel to the Divine Promise to the Prophet ﷺ):
इस आयत में नबी ﷺ के साथ अल्लाह के वादे की समानता भी दिखाई देती है। सुरह अर्ध-धुहा (93:5) में अल्लाह ने नबी ﷺ को और अधिक कृपा देने का वादा किया था, और इसी तरह सुरह अल-लैल (92:21) में हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (RA) के लिए यह वादा किया गया है कि अल्लाह जल्द ही उन्हें अपनी कृपा से पूरी तरह संतुष्ट करेंगे। दोनों वादे यह बताते हैं कि अल्लाह के प्रिय, जैसे हज़रत अबू बकर (RA), अल्लाह की दी हुई अद्वितीय कृपा और निकटता का अनुभव करेंगे, जो इस दुनिया के किसी भी सुख से कहीं बेहतर होगा।

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