कुरान - 92:16 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
ٱلَّذِي كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ

Transliteration: (Allazee kazzaba wa tawallaa )

16.जो सत्य को नकारते हैं और अपनी पीठ फेर लेते हैं। [14] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफसीर (Tafsir) - "जो सच्चाई को नकारते हैं और अपनी पीठ फेरते हैं"
(Commentary of the Verse: "Who Deny the Truth and Turn Their Back")

आयत का अर्थ (Meaning of the Verse):

यह आयत उन व्यक्तियों को संदर्भित करती है जो जानबूझकर सच्चाई को नकारते हैं, चाहे वह इस्लामी क़ानून हो, पवित्र क़ुरान हो, या पैगंबर ﷺ की शिक्षाएँ और मिशन। "पीठ फेरना" सच्चाई से मुँह मोड़ने, उसके महत्व को नकारने और उसे अपनी क्रियाओं से विरोध करने का एक रूपक है। ऐसे व्यक्तियों ने न केवल अपने शरीर से, बल्कि अपनी आत्मा से भी अपराध किया है, क्योंकि उन्होंने ईश्वरीय मार्गदर्शन (Hidayat) को नकारा और नास्तिकता तथा अवज्ञा का रास्ता चुना।

आयत से उत्पन्न मुख्य मुद्दे (Key Issues Arising from the Verse):

एक पापी विश्वास रखने वाले और नरक की गंभीरता (A Sinful Believer and the Severity of Hell):
एक पापी विश्वास रखने वाले व्यक्ति को नरक की गंभीर सजा नहीं दी जाएगी, क्योंकि नास्तिकों के विपरीत, उनका दिल पूरी तरह से सच्चाई को नकारता नहीं है। वे भले ही पाप करें, लेकिन उनका विश्वास (ईमान) और पैगंबर ﷺ पर विश्वास बरकरार रहता है। ऐसे व्यक्तियों के लिए सजा कम गंभीर होती है क्योंकि वे अपने कर्मों में चूक करने के बावजूद सच्चाई में विश्वास रखते हैं।

नास्तिकों के छोटे बच्चों का भविष्य (The Fate of Minor Children of Infidels):
नास्तिकों के छोटे बच्चे अपने माता-पिता के नास्तिकता या कर्मों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराए जाते, और इसलिए वे नरक के निवासी नहीं होंगे। चूँकि उन्होंने न तो अपने दिल से, न ही अपनी क्रियाओं से पाप किए हैं, वे अल्लाह के दृष्टिकोण से अपराधी नहीं माने जाते। यह अल्लाह की दया और न्याय को स्पष्ट करता है, क्योंकि बच्चों को दूसरों के कर्मों के लिए सजा नहीं दी जाती।

क़ुरान और धार्मिक लोगों का सम्मान (Importance of Respecting the Quran and the Pious):
यह आयत यह भी सिखाती है कि पवित्र क़ुरान और उन धार्मिक व्यक्तियों का सम्मान करना कितना महत्वपूर्ण है जो अल्लाह की शिक्षाओं को बनाए रखते हैं। यह अनुमति नहीं है कि आप क़ुरान या धार्मिक व्यक्तियों के प्रति अपनी पीठ मोड़कर बैठें, क्योंकि यह क्रिया सच्चाई से मुँह मोड़ने का प्रतीक है। ऐसा अपमान एक प्रकार की लापरवाही है और इसे अल्लाह के मार्गदर्शन (Hidayat) के खिलाफ विद्रोह माना जा सकता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now