कुरान - 92:18 सूरह अल-लैल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
ٱلَّذِي يُؤۡتِي مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ

Transliteration: (Allazee yu'tee maalahoo yatazakkaa)

18. जो अपना धन इस उद्देश्य से देता है कि वह शुद्ध हो जाए। [17] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-लैल आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफसीर (Tafsir) - "जो धन देता है ताकि वह शुद्ध हो जाए"
(Commentary of the Verse: "Who Gives Wealth to Become Purified")

आयत का मतलब (Meaning of the Verse):

यह आयत यह बताती है कि अल्लाह की राह में धन देना शुद्धता के लिए है। दान करना, खासकर जब यह सच्चे दिल से किया जाए, सिर्फ एक भौतिक मदद नहीं है, बल्कि यह आत्मा को शुद्ध करने का एक तरीका है। जब कोई दान अल्लाह की رضا के लिए किया जाता है, तो यह इंसान की आत्मा को साफ करता है और उसे अल्लाह की दया और आशीर्वाद के करीब लाता है।

आयत से जुड़ी मुख्य बातें (Key Issues Arising from the Verse):

हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ के दान को अल्लाह ने स्वीकार किया (Hazrat Abu Bakr Siddique’s Charities Are Accepted by Allah):
हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ का दान बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने इसे पूरी सच्चाई और अल्लाह की खुशी के लिए किया। जैसे, जब तबुक की जंग में हज़रत अबू बकर (RA) ने अपनी सारी दौलत अल्लाह की राह में दे दी थी। यह उनका निस्वार्थ और समर्पण दिखाता है। पैगंबर ﷺ ने भी अपने सभी सामान को खुशी-खुशी खर्च किया। मस्जिद-ए-नबवी के लिए ज़मीन भी हज़रत अबू बकर (RA) ने दी थी। इसके अलावा, हज़रत अबू बकर (RA) ने हज़रत बिलाल और अन्य दासों को आज़ाद किया, जो उनकी दानशीलता और अच्छे कामों को दिखाता है।

दान में सच्चाई (Sincerity in Charity):
हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ के दान में सच्ची नीयत थी, और अल्लाह खुद उनकी नीयत को सच्चा मानते हैं। उनके द्वारा दिया गया हर दान पूरी निष्ठा से किया गया था, और यही कारण है कि अल्लाह ने उसे स्वीकार किया। यह नीयत केवल सामान देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह दिल से किया गया था, जिससे जरूरतमंदों का दिल भी खुश हुआ।

दान से दिल की शुद्धि (Charity as a Means of Purification of the Heart):
"शुद्ध होने के लिए" का मतलब यह है कि यह आयत ज़कात के बारे में नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धता के बारे में है जो दान करने से मिलती है। जब कोई सच्चे दिल से दान करता है, तो उसका दिल साफ होता है और उसकी आत्मा रोशन होती है। यह दान करने का तरीका स्वार्थ और लालच को दूर करता है, और इंसान को अल्लाह की दया के पास लाता है। हज़रत अबू बकर (RA) द्वारा दिया गया धन और पानी भी दिल को शुद्ध करने के रूप में देखा जाता है, और पैगंबर ﷺ के द्वारा दी गई चीज़ें भी आत्मिक शांति देने वाली मानी जाती हैं।

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