कुरान - 5:67 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
۞يَـٰٓأَيُّهَا ٱلرَّسُولُ بَلِّغۡ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَۖ وَإِن لَّمۡ تَفۡعَلۡ فَمَا بَلَّغۡتَ رِسَالَتَهُۥۚ وَٱللَّهُ يَعۡصِمُكَ مِنَ ٱلنَّاسِۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhar Rasoolu balligh maaa unzila ilaika mir Rabbika wa il lam taf'al famaaa ballaghta Risaalatah; wallaahu ya'simuka minan naas; innal laaha laa yahdil qawmal kaafireen)

"ऐ रसूल! पहुंचा दो वह चीज़ जो तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाज़िल की गई है। और अगर तुम ऐसा न करोगे, तो तुमने उसका पैग़ाम ही नहीं पहुंचाया [201]। और अल्लाह तुम्हारी लोगों से हिफ़ाज़त करेगा [202]। बेशक अल्लाह काफ़िर लोगों को हिदायत नहीं देता [203]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 67 की तफ़्सीर

 

✅ [201] "अगर तुम ऐसा न करोगे, तो तुमने उसका पैग़ाम ही नहीं पहुंचाया…"

  • यह हुक्म रसूलुल्लाह ﷺ को पूरा इस्लामी पैग़ाम बिना किसी डर या छुपाव के आम करने का था।
  • इसका मक़सद यह बताना है कि किसी भी हुक्म को छोड़ना, पूरे दीन की तबलीग़ को अधूरा बना देता।
  • रसूलुल्लाह ﷺ ने कुछ भी नहीं छुपाया, और हर हुक्म को वाज़ेह और खुलकर बयान किया।

✅ [202] "और अल्लाह तुम्हारी लोगों से हिफ़ाज़त करेगा…"

  • रसूलुल्लाह ﷺ की जान के दुश्मन बहुत थे, लेकिन यह आयत अल्लाह की तरफ़ से वादा थी कि
    अब उसे किसी इंसानी हिफ़ाज़त की ज़रूरत नहीं, क्योंकि अल्लाह खुद हिफ़ाज़त करेगा।
  • ग़ज़वा-ए-उहुद में लगी चोटें इस वादे के खिलाफ़ नहीं, क्योंकि शहादत दुश्मनों के हाथ से नहीं हुई।

✅ [203] "अल्लाह काफ़िर लोगों को हिदायत नहीं देता…"

  • काफ़िरों की दुश्मनी के बावजूद, वही हिदायत पाएगा जो दिल से सच्चाई कबूल करेगा।
  • काफ़िर अपनी चालें चलते हैं, लेकिन अल्लाह की मर्जी के बग़ैर किसी को नुक़सान नहीं पहुंचा सकते।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now