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وَلَوۡ أَنَّهُمۡ أَقَامُواْ ٱلتَّوۡرَىٰةَ وَٱلۡإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِم مِّن رَّبِّهِمۡ لَأَكَلُواْ مِن فَوۡقِهِمۡ وَمِن تَحۡتِ أَرۡجُلِهِمۚ مِّنۡهُمۡ أُمَّةٞ مُّقۡتَصِدَةٞۖ وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ سَآءَ مَا يَعۡمَلُونَ
Transliteration: (Wa law annahum aqaamut Tawraata wal Injeela wa maaa unzila ilaihim mir Rabbihim la akaloo min fawqihim wa min tahti arjulihim; minhum ummatum muqta sidatunw wa kaseerum minhum saaa'a maa ya'maloon)
"और अगर वह लोग तौरेत [198] और इंजील को और जो कुछ उनके रब की तरफ़ से उनकी तरफ़ नाज़िल किया गया है, उसको क़ायम रखते, तो यक़ीनन वो अपने ऊपर से और अपने पांवों के नीचे से रिज़्क़ खाते [199]। उनमें एक मध्यम मार्ग पर चलने वाली जमाअत भी है, मगर उनमें से अक्सर लोग बुरे काम कर रहे हैं [200]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)
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