Transliteration: (Wamra-atuhoo hammaa latal-hatab)
6. उम्म जमीलाह का भाग्य (Fate)
उम्म जमीलाह बिन्त हरब ibn उमैयाह, जो अबू सूफ़ियान की बहन थीं, को औरार के नाम से भी जाना जाता था, और उनका उपनाम उम्म जमीलाह था। वह भी रसूल अल्लाह (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) के प्रति अपनी घृणा (enmity) के कारण जहन्नम (Hell) भेजी जाएँगी। वह जंगल से कांटों का एक गट्ठर (bundle) अपने सिर पर लेकर आती थीं और उसे रसूल अल्लाह (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) के रास्ते में रख देती थीं ताकि उनके नाजुक (sensitive) पैरों में चुभकर उन्हें दर्द (pain) और कष्ट (hardship) पहुंचे।
इससे हम यह समझते हैं कि यदि मूर्तिपूजक (polytheists) समाज में विवाह इस्लामी कानून (Islamic law) के अनुसार न भी हुआ हो, तो भी वे सांसारिक (worldly) दृष्टि से वैध (valid) होते हैं। इसका उदाहरण यह है कि अल्लाह ने उम्म जमीलाह को अबू लहब की पत्नी के रूप में संदर्भित किया। इसलिए, अविश्वासियों (non-believers) के बच्चे वैध (legitimate) होते हैं और उन्हें विरासत (inheritance) का अधिकार होता है।
7. उम्म जमीलाह की दुश्मनी की गंभीरता (severity)
उम्म जमीलाह की रसूल अल्लाह (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) के प्रति दुश्मनी (enmity) इतनी गंभीर (severe) थी कि अपनी समृद्धि (wealth) के बावजूद, वह व्यक्तिगत रूप से जंगल में जाती थीं, कांटे इकट्ठा करती थीं और उन्हें अपने सिर पर रखकर रसूल अल्लाह (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) के रास्ते में रख देती थीं। उन्होंने इस काम में अपनी नौकरानियों (maids) या सेवकों (servants) से मदद नहीं ली थी।
यह दर्शाता है कि उनके कार्य केवल व्यक्तिगत (personal) शिकायत (grievance) नहीं थे, बल्कि उनकी दुष्टता (wickedness) का एक सांसारिक दंड (worldly punishment) थे। कांटे जो उन्होंने रसूल अल्लाह (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) के रास्ते में रखे, वे प्रतीक हैं उन कांटों के जो उन्हें इस दुनिया और आख़िरत (Hereafter) दोनों में कष्ट देंगे। जो भी व्यक्ति रसूल अल्लाह (صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ) के प्रति दुश्मनी (enmity) रखेगा, वह अंततः इस जीवन और अगले जीवन में दुखों (suffering) का सामना करेगा।
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