कुरान - 23:38 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
إِنۡ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗا وَمَا نَحۡنُ لَهُۥ بِمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (In huwa illaa rajulunif taraa 'alal laahi kazibanw wa maa nahnuu lahoo bimu'mineen)

38. वह तो बस एक ऐसा शख़्स है जिसने अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधा है [60], और हम हरगिज़ उस पर ईमान लाने वाले नहीं हैं [61] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 38 की तफ़सीर

"वह तो बस एक ऐसा शख़्स है जिसने अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधा है [60], और हम हरगिज़ उस पर ईमान लाने वाले नहीं हैं [61] ।'"

[60] अल्लाह को मानना मगर रसूल का इनकार करना

काफ़िर अल्लाह के वजूद के मुन्किर नहीं थे, बल्कि वे नबी की रिसालत और उनके लाए हुए अहकाम का इनकार करते थे और कहते थे कि यह अल्लाह पर अपनी तरफ़ से बात बनाते हैं।

[61] सिर्फ़ रसूल के इनकार से इंसान काफ़िर हो जाता है

अगर कोई शख़्स अल्लाह को माने मगर अल्लाह के रसूल ﷺ का ज़रा सा भी इनकार या बे-अदबी करे, तो वह मुकम्मल काफ़िर हो जाता है। शैतान भी अल्लाह को मानता था, मगर नबी (हज़रत आदम) की ताज़ीम न करने की वजह से हमेशा के लिए मरदूद हो गया।

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