Transliteration: (In huwa illaa rajulunif taraa 'alal laahi kazibanw wa maa nahnuu lahoo bimu'mineen)
"वह तो बस एक ऐसा शख़्स है जिसने अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधा है [60], और हम हरगिज़ उस पर ईमान लाने वाले नहीं हैं [61] ।'"
काफ़िर अल्लाह के वजूद के मुन्किर नहीं थे, बल्कि वे नबी की रिसालत और उनके लाए हुए अहकाम का इनकार करते थे और कहते थे कि यह अल्लाह पर अपनी तरफ़ से बात बनाते हैं।
अगर कोई शख़्स अल्लाह को माने मगर अल्लाह के रसूल ﷺ का ज़रा सा भी इनकार या बे-अदबी करे, तो वह मुकम्मल काफ़िर हो जाता है। शैतान भी अल्लाह को मानता था, मगर नबी (हज़रत आदम) की ताज़ीम न करने की वजह से हमेशा के लिए मरदूद हो गया।
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