कुरान - 23:118 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

118
وَقُل رَّبِّ ٱغۡفِرۡ وَٱرۡحَمۡ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلرَّـٰحِمِينَ

Transliteration: (Wa qul Rabbigh fir warham wa Anta khairur raahimeen (section 6))

और (ऐ नबी!) आप दुआ कीजिए, 'ऐ मेरे रब! बख़्श दे [163] और रहम फ़रमा, और तू ही सबसे बेहतरीन रहम फ़रमाने वाला है!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 118 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 118

"और आप दुआ कीजिए, 'ऐ मेरे रब! बख़्श दे [163] और रहम फ़रमा, और तू ही सबसे बेहतरीन रहम फ़रमाने वाला है!'"

[163] मग़फ़िरत व रहमत की जामेअ दुआ

यह सूरह अल-मोमिनून का इख़्तिताम एक निहायत जामेअ और मुबारक़ दुआ पर होता है। हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ को मग़फ़िरत (गुनाहों की मुआफ़ी) और रहमत (नेअमतों व बरकतों के हुसूल) की दुआ सिखाकर पूरी उम्मत को यह दर्स दिया गया कि इंसान का सहारा सिर्फ़ अल्लाह की मग़फ़िरत और उसकी बेपनाह रहमत है।

हुज़ूर ﷺ का यह दुआ फ़रमाना उम्मत की शफ़ाअत और उनकी बख़्शिश के लिए है। और 'ख़ैरुर-राहिमीन' का ख़ात्मा यह यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह से बढ़कर कोई मेहरबान और रहम फ़रमाने वाला नहीं।

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