कुरान - 23:114 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

114
قَٰلَ إِن لَّبِثۡتُمۡ إِلَّا قَلِيلٗاۖ لَّوۡ أَنَّكُمۡ كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qaala il labistum illaa qaleelal law annakum kuntum ta'lamoon)

अल्लाह फ़रमाएगा, 'तुम तो बस बहुत ही थोड़ी मुद्दत रहे, काश कि तुम (दुनिया में ही यह बात) जानते होते [156]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 114 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 114

"अल्लाह फ़रमाएगा, 'तुम तो बस बहुत ही थोड़ी मुद्दत रहे, काश कि तुम जानते होते' [156]!"

[156] दुनियावी ज़िन्दगी की मुफ़्त मुद्दत और हसरत

अल्लाह तआला फ़रमाएगा कि वाक़ई तुम्हारी दुनियावी मुद्दत बहुत ही मुख़्तसर थी। काश कि तुमने दुनिया में रहते हुए इसकी हक़ीक़त को समझा होता और इस चंद रोज़ा ज़िन्दगी को हमेशा की आख़िरत संवारने में लगाया होता!

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