कुरान - 23:116 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

116
فَتَعَٰلَى ٱللَّهُ ٱلۡمَلِكُ ٱلۡحَقُّۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡكَرِيمِ

Transliteration: (Fata'aalal laahul Malikul Haqq; laaa ilaaha illaa Huwa Rabbul 'Arshil Kareem)

पस बहुत ही बुलन्द व बरतर है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है! उसके सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वह इज़्ज़तदार (बुज़ुर्ग) अर्श का रब (मालिक) है [159]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 116 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 116

"पस बहुत ही बुलन्द व बरतर है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है! उसके सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वह इज़्ज़तदार अर्श का रब है [159]।"

[159] सच्चा बादशाह और अर्श-ए-करीम का रब

अल्लाह तआला हर ऐब, नुक़्स और मुशरिकों के बातिल अक़ीदों से पाक और बुलन्द है। वही सच्चा, दायमी और मुतलक़ हाकिम है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और वह अर्श-ए-करीम (बुज़ुर्ग अर्श) का ख़ालिक़ व मालिक है।

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