कुरान - 23:1 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
قَدۡ أَفۡلَحَ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Qad aflahal mu'minoon)

1. यक़ीनन ईमान वाले अपने मक़सद को पहुंच गए [1] ! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 1 की तफ़सीर

"यक़ीनन ईमान वाले अपने मक़सद को पहुंच गए [1] !"

[1] मोमिनीन की हक़ीक़ी फ़लाह व कामयाबी

अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया कि जिनके पास कामिल ईमान है, वे दोनों जहानों में अपनी मुराद और मक़सद को पा गए:

  • आख़िरत में: वे जहन्नम से निजात पाकर जन्नतुल फ़िरदौस की दायमी नेमतों और अल्लाह तआला के दीदारे इलाही के हक़दार बन गए।

  • दुनिया में: उनकी दुआएं बारगाहे इलाही में मक़बूल होती हैं, उनकी ज़िंदगी बा-बरकत और पुर-अमन होती है, और अल्लाह की ग़ैबी नुसरत उनके साथ रहती है।

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