कुरान - 23:2 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
ٱلَّذِينَ هُمۡ فِي صَلَاتِهِمۡ خَٰشِعُونَ

Transliteration: (Allazeena hum fee Salaatihim khaashi'oon)

2. जो अपनी नमाज़ में ख़ुशूअ (अदब, सुकून और दिल का झुकना) अपनाने वाले हैं [2]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 2 की तफ़सीर

"जो अपनी नमाज़ में ख़ुशूअ (अदब, सुकून और दिल का झुकना) अपनाने वाले हैं [2];"

[2] नमाज़ में ख़ुशूअ व ख़ुज़ूअ

फ़लाह पाने वाले मोमिनीन की पहली सिफ़त यह है कि वे अपनी नमाज़ों में ख़ुशूअ इख़्तियार करते हैं। ख़ुशूअ का मफ़हूम यह है कि:

  • दिल अल्लाह की अज़मत और ख़ौफ़ से लरज़ता रहे।

  • जिस्म के आज़ा पुर-सुकून रहें और फ़ुज़ूल हरकात से पाक हों।

  • नज़र सजदे की जगह पर जमी रहे और दिल हर तरह के दुनियावी वसवसों से खाली होकर ख़ालिस अल्लाह की तरफ़ मुतवज्जेह हो।

अदब और तक़्वा ही इबादत की जान है; इसी से दुआएं मक़बूल होती हैं और बलाएं दूर होती हैं।

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