कुरान - 23:7 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
فَمَنِ ٱبۡتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡعَادُونَ

Transliteration: (Famanib taghaa waraaa'a zaalika fa ulaaa'ika humul 'aadoon)

7. पस जो शख़्स इसके सिवा कोई और रास्ता तलाश करे, तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले (गुनहगार) हैं [7]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 7 की तफ़सीर

"पस जो शख़्स इसके सिवा कोई और रास्ता तलाश करे, तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले (गुनहगार) हैं [7];"

[7] हराम तरीक़ों (मुतआ, जिना व़ग़ैरह) की मुमानअत

इस आयते करीमा से साबित हुआ कि बीवी के अलावा जिन्सी ख़्वाहिश पूरी करने के तमाम ग़ैर-शरई तरीक़े हराम और गुनाहे कबीरा हैं:

  • मुतआ (आरज़ी निकाह): यह हराम है क्योंकि मुतआ वाली औरत न शरई बीवी होती है (जिसमें मीरास और तलाक़ के अहकाम जारी हों) और न लौंडी। इस्लाम में मुतआ हमेशा के लिए हराम कर दिया गया है।

  • मुश्तज़नी (हस्तमैथुन) व अग़लामबाज़ी: यह भी शरीअत की हदों से तजावुज़ है और सख़्त गुनाह है।

जवानी की शहवत को दबाने के लिए हदीस शरीफ़ में रोज़ा रखने की तालीम दी गई है।

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