Transliteration: (Famanib taghaa waraaa'a zaalika fa ulaaa'ika humul 'aadoon)
"पस जो शख़्स इसके सिवा कोई और रास्ता तलाश करे, तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले (गुनहगार) हैं [7];"
इस आयते करीमा से साबित हुआ कि बीवी के अलावा जिन्सी ख़्वाहिश पूरी करने के तमाम ग़ैर-शरई तरीक़े हराम और गुनाहे कबीरा हैं:
मुतआ (आरज़ी निकाह): यह हराम है क्योंकि मुतआ वाली औरत न शरई बीवी होती है (जिसमें मीरास और तलाक़ के अहकाम जारी हों) और न लौंडी। इस्लाम में मुतआ हमेशा के लिए हराम कर दिया गया है।
मुश्तज़नी (हस्तमैथुन) व अग़लामबाज़ी: यह भी शरीअत की हदों से तजावुज़ है और सख़्त गुनाह है।
जवानी की शहवत को दबाने के लिए हदीस शरीफ़ में रोज़ा रखने की तालीम दी गई है।
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