Transliteration: (Wallazeena hum 'alaa Salawaatihim yuhaafizoon)
"और जो अपनी नमाज़ों की (वक़्त और अरकान के साथ) हिफ़ाज़त करते हैं [9];"
नमाज़ की हिफ़ाज़त करने के तीन अहम दरजे हैं:
दवाम: हमेशा हर रोज़ पाबन्दी से नमाज़ पढ़ना।
वक़्त की पाबंदी: हर नमाज़ को उसके मुस्तहब व मसनून वक़्त पर अदा करना।
हुस्ने अदायगी: वाजिबात, सुन्नतें और आदाब पूरे करके बा-जमाअत अदा करना।
सूरत की इब्तिदा भी नमाज़ से हुई (आयत 2) और मोमिनीन के औसाफ़ का ख़ातमा भी नमाज़ की मुहाफ़िज़त पर हुआ, जिससे साबित हुआ कि नमाज़ तमाम इबादतों का सुतून और मोमिन की मेअराज है।
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