कुरान - 23:6 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
إِلَّا عَلَىٰٓ أَزۡوَٰجِهِمۡ أَوۡ مَا مَلَكَتۡ أَيۡمَٰنُهُمۡ فَإِنَّهُمۡ غَيۡرُ مَلُومِينَ

Transliteration: (Illaa 'alaaa azwaajihim aw maa malakat aimaanuhum fa innahum ghairu maloomeen)

6. सिवाय अपनी बीवियों या उन (औरतों) के जो उनकी मल्कियत में हों, तो बेशक उन पर (इस मामले में) कोई मलामत (इल्ज़ाम) नहीं है [6]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 6 की तफ़सीर

"सिवाय अपनी बीवियों या उन (औरतों) के जो उनकी मल्कियत में हों, तो बेशक उन पर (इस मामले में) कोई मलामत (इल्ज़ाम) नहीं है [6];"

[6] शरई और जाइज़ ताअल्लुक़ात की हुदूद

इस्लाम में जिन्सी ख़्वाहिशात की तकमील सिर्फ़ शरई निकाह के ज़रिये अपनी बीवी या शरई लौंडी के साथ जाइज़ है। इसके अलावा किसी भी औरत के साथ ताअल्लुक़ हराम और क़ाबिले मलामत है।

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