Transliteration: (Afahasibtum annamaa khalaqnaakum 'abasanw wa annakum ilainaa laa turja'oon)
"तो क्या तुमने यह समझ रखा था कि हमने तुम्हें बेमक़सद पैदा किया है [157], और यह कि तुम हमारी तरफ़ कभी वापस नहीं लाए जाओगे [158]?"
अल्लाह तआला ने इंसान को खेल-तमाशे या बेमक़सद नहीं बनाया, बल्कि अपनी मारिफ़त, इबादत और आज़माइश के लिए पैदा फ़रमाया है। जो लोग बेफ़िक्र होकर गुनाहों में ज़िन्दगी गुज़ारते हैं, यह आयत उनके ग़फ़लत भरे ख़यालात को झकझोरती है।
हर इंसान को मरकर दोबारा ज़िन्दा होना है और अल्लाह के हुज़ूर अपने एक-एक अमल का हिसाब देना है। इस वापसी से कोई बच नहीं सकता।
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