Transliteration: (Wa mai yad'u ma'allaahi ilaahan aakhara laa burhaana lahoo bihee fa inna maa hisaabuhoo 'inda Rabbih; innahoo laa yuflihul kaafiroon)
"और जो शख़्स अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को पूजे [160] जिसकी उसके पास कोई दलील नहीं [161], तो उसका हिसाब उसके रब ही के पास है [162]; बेशक काफ़िर लोग कभी फ़लाह नहीं पाएंगे।"
अल्लाह के सिवा किसी भी मख़्लूक़ की इबादत या उसे माबूद मानना मुतलक़ बातिल और शिर्क है।
शिर्क के हक़ में न कोई अक़्ली दलील है और न ही किसी नबी या आसमानी किताब ने कभी इसकी इजाज़त दी। यह महज़ जहालत और वहम है।
ऐसे मुशरिकों का मुकम्मल हिसाब अल्लाह के पास है और वे आख़िरत में हरगिज़ नजात नहीं पा सकेंगे बल्कि दायमी अज़ाब भुगतेंगे।
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