कुरान - 23:113 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

113
قَالُواْ لَبِثۡنَا يَوۡمًا أَوۡ بَعۡضَ يَوۡمٖ فَسۡـَٔلِ ٱلۡعَآدِّينَ

Transliteration: (Qaaloo labisnaa yawman aw ba'da yawmin fas'alil 'aaaddeen)

वे कहेंगे, 'हम एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा [154] ही रहे, पस आप गिनती रखने वालों (फ़रिश्तों) से पूछ लीजिए [155]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 113 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 113

"वे कहेंगे, 'हम एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा ही रहे [154], पस आप गिनती रखने वालों से पूछ लीजिए' [155]।"

[154] दुनियावी ज़िन्दगी की नापायदारी का एहसास

क़ियामत और आख़िरत की दायमी मुद्दत के मुक़ाबले में उन्हें अपनी सत्तर-अस्सी साल की दुनियावी ज़िन्दगी एक दिन या चंद लम्हों की तरह महसूस होगी और वे अपनी कोताही पर शर्मसार होंगे।

[155] हिसाबरस फ़रिश्ते

वे कहेंगे कि आमाल और औक़ात का हिसाब रखने वाले फ़रिश्तों से पूछ लिया जाए जो एक-एक लम्हे का पूरा रिकॉर्ड रखते हैं।

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