कुरान - 23:111 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
إِنِّي جَزَيۡتُهُمُ ٱلۡيَوۡمَ بِمَا صَبَرُوٓاْ أَنَّهُمۡ هُمُ ٱلۡفَآئِزُونَ

Transliteration: (Inee jazaituhumul Yawma bimaa sabarooo annahum humul faaa'izoon)

बेशक आज मैंने उन्हें उनके सब्र का यह बदला दिया है [152] कि वही लोग कामयाब (कामरां) हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 111

"बेशक आज मैंने उन्हें उनके सब्र का यह बदला दिया है [152] कि वही लोग कामयाब हैं।"

[152] सब्र का बेहिसाब और अज़ीम सिला

जिन मोमिनों ने दुनिया में तकलीफ़ों, ज़ुल्म और मुशरिकों के मज़ाक़ पर सब्र किया और अपने दीन पर जमे रहे, आज अल्लाह तआला ने उन्हें ऐसा अज़ीम अज्र व सवाब दिया जो इंसान के वहम व गुमान से भी बाहर है। वे हमेशा के लिए कामयाब व कामरां हो गए।

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