कुरान - 23:110 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
فَٱتَّخَذۡتُمُوهُمۡ سِخۡرِيًّا حَتَّىٰٓ أَنسَوۡكُمۡ ذِكۡرِي وَكُنتُم مِّنۡهُمۡ تَضۡحَكُونَ

Transliteration: (Fattakhaztumoohum sikhriyyan hattaaa ansawkum zikree wa kuntum minhum tadhakoon)

तो तुमने उन्हें एक मज़ाक़ बना लिया [150], यहाँ तक कि (इस मज़ाक़ उड़ाने ने) तुम्हें मेरी याद तक भुला दी [151], और तुम उन पर हंसा करते थे! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 110

"तो तुमने उन्हें एक मज़ाक़ बना लिया [150], यहाँ तक कि तुम्हें मेरी याद भुला दी [151], और तुम उन पर हंसा करते थे!"

[150] अल्लाह वालों का मज़ाक़ उड़ाना

मुशरिक और मुनकिर लोग दुनिया में इन नेक और ग़रीब मोमिनों (जैसे हज़रत बिलाल, अम्मार, सुहैब रज़ियल्लाहु अन्हुम) का मज़ाक़ उड़ाया करते थे और उनकी सादगी व इबादत पर हंसते थे।

[151] ग़फ़लत और ज़िक्र-ए-इलाही की फ़रामोशी

अल्लाह वालों का मज़ाक़ उड़ाते-उड़ाते वे इस हद तक ग़फ़लत में डूब गए कि उन्हें अल्लाह की याद और आख़िरत की फ़िक्र तक भूल गई। नेक लोगों का इस्तेहज़ा इंसान को रूहानी बर्बादी और कुफ़्र तक पहुंचा देता है।

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