कुरान - 23:41 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّيۡحَةُ بِٱلۡحَقِّ فَجَعَلۡنَٰهُمۡ غُثَآءٗۚ فَبُعۡدٗا لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Fa akhazat humus saihatu bilhaqqi faja'alnaahum ghusaaa'aa; fabu'dal lilqaw miz zaalimeen)

41. पस एक ज़बरदस्त चीख़ (कड़क) ने हक़ के साथ उन्हें आ पकड़ा [64], फिर हमने उन्हें कूड़ा-करकट (घास-फूस का ढेर) बना दिया; पस लानत व दूरी हो ज़ालिम लोगों के लिए [65] ! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 41 की तफ़सीर

"पस एक ज़बरदस्त चीख़ (कड़क) ने हक़ के साथ उन्हें आ पकड़ा [64], फिर हमने उन्हें कूड़ा-करकट (घास-फूस का ढेर) बना दिया; पस लानत व दूरी हो ज़ालिम लोगों के लिए [65] !"

[64] हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की होलनाक चीख़

यह आयत क़ौमे समूद (हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम) के बारे में है जिन्हें हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की एक भयानक और आसमान हिला देने वाली चीख़ ने हलाक कर दिया। उनके दिल फट गए और वे सूखे पत्तों और कूड़े-करकट की तरह ढेर हो गए।

[65] रसूल की तकज़ीब के बाद ही अज़ाब

अल्लाह तआला का उसूल है कि वह किसी क़ौम को तब तक हलाक नहीं फ़रमाता जब तक उनमें रसूल भेजकर हुज्जत पूरी न कर दे। जब रसूल की मुसलसल तकज़ीब की गई, तब उन पर अज़ाब नाज़िल हुआ।

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