Transliteration: (Fa akhazat humus saihatu bilhaqqi faja'alnaahum ghusaaa'aa; fabu'dal lilqaw miz zaalimeen)
"पस एक ज़बरदस्त चीख़ (कड़क) ने हक़ के साथ उन्हें आ पकड़ा [64], फिर हमने उन्हें कूड़ा-करकट (घास-फूस का ढेर) बना दिया; पस लानत व दूरी हो ज़ालिम लोगों के लिए [65] !"
यह आयत क़ौमे समूद (हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम) के बारे में है जिन्हें हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की एक भयानक और आसमान हिला देने वाली चीख़ ने हलाक कर दिया। उनके दिल फट गए और वे सूखे पत्तों और कूड़े-करकट की तरह ढेर हो गए।
अल्लाह तआला का उसूल है कि वह किसी क़ौम को तब तक हलाक नहीं फ़रमाता जब तक उनमें रसूल भेजकर हुज्जत पूरी न कर दे। जब रसूल की मुसलसल तकज़ीब की गई, तब उन पर अज़ाब नाज़िल हुआ।
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