Transliteration: (Maa tasbiqu min ummatin ajalahaa wa maa yastaakhiroon)
"कोई भी उम्मत न तो अपनी मुक़र्ररा मुद्दत से आगे बढ़ सकती है और न पीछे रह सकती है;"
अल्लाह तआला ने हर उम्मत और हर क़ौम के लिए ज़िंदगी और मौत की एक मुक़र्ररा मुद्दत (अजल) लिख दी है। जब अल्लाह का मुक़र्रर किया हुआ वक़्त आ पहुंचता है, तो न उसमें एक लम्हे की ताख़ीर हो सकती है और न वह पहले आ सकता है। यह कायनात के हर फ़र्द और हर क़ौम पर अल्लाह की कामिल क़ुदरत और अज़ली तक़दीर की दलील है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat