Transliteration: (Summa arsalnaa Rusulanaa tatraa kulla maa jaaa'a ummatar Rasooluhaa kazzabooh; fa atba'naa ba'dahum ba'danw wa ja'alnaahum ahaadees; fabu'dal liqawmil laa yu'minoon)
"फिर हमने अपने रसूल लगातार एक के बाद एक भेजे; जब भी किसी उम्मत के पास उसका रसूल आया, तो उन्होंने उसे झुठलाया; पस हमने (हलाकत में) एक को दूसरे के पीछे लगा दिया [67] और हमने उन्हें सिर्फ़ अफ़साने (कहानियां) बना डाला [68]; पस लानत व दूरी हो उन लोगों के लिए जो ईमान नहीं लाते [69] !"
जब भी किसी क़ौम ने अपने नबी की तकज़ीब की, तो अल्लाह ने उन्हें पिछली हलाकशुदा क़ौमों के साथ मिला दिया और नेस्तो-नाबूद कर दिया।
उन बड़ी-बड़ी ताक़तवर क़ौमों का कोई नामो-निशान न बचा; वे सिर्फ़ तारीख़ के सफ़हात पर इब्रतनाक कहानियां बनकर रह गईं।
जो लोग ईमान नहीं लाते, वे अल्लाह की रहमत से हमेशा के लिए दूर और महरूम कर दिए जाते हैं।
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