कुरान - 23:46 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمًا عَالِينَ

Transliteration: (Ilaa Fir'awna wa mala'ihee fastakbaroo wa kaanoo qawman 'aaleen)

46. फ़िरऔन और उसके सरदारों की तरफ़ [71], मगर उन्होंने तकब्बुर (घमंड) किया और वे बड़े सरकश व ज़ालिम लोग थे [72]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 46 की तफ़सीर

"फ़िरऔन और उसके सरदारों की तरफ़ [71], मगर उन्होंने तकब्बुर (घमंड) किया और वे बड़े सरकश व ज़ालिम लोग थे [72];"

[71] हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत फ़िरऔन के दरबार में

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को मिस्र के तमाम बाशिंदों—क़िब्ती, बनी इसराईल और फ़िरऔन व उसके दरबारियों—की तरफ़ मबऊ़स फ़रमाया गया था ताकि वे शिर्क और ज़ुल्म छोड़कर तौहीद को अपनाएं।

[72] इक़्तिदार का नशा और ज़ुल्म

फ़िरऔन और उसके दरबारियों को अपनी हुकूमत और ताक़त पर बड़ा घमंड था। वे बनी इसराईल पर ज़ुल्म ढाते थे और खुद को सबसे आला समझते थे। दुनियावी इक़्तिदार पाकर तकब्बुर करना हमेशा से मुकज़्ज़िबीन का शेवा रहा है।

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