कुरान - 28:68 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
وَرَبُّكَ يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُ وَيَخۡتَارُۗ مَا كَانَ لَهُمُ ٱلۡخِيَرَةُۚ سُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Wa Rabbuka yakhuluqu maa yashaaa'u wa yakhtaar; maa kaana lahumul khiyarah; Subhannal laahi wa Ta'aalaa 'ammmaa yushrikoon)

और आपका रब जो चाहता है पैदा करता है और जिसे चाहता है चुन लेता है [168]; उनके पास कोई इख़्तियार नहीं [169]; पाक है अल्लाह और बहुत बुलंद है उस शिर्क से जो ये करते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 68

"और आपका रब जो चाहता है पैदा करता है और जिसे चाहता है चुन लेता है [168]; उनके पास कोई इख़्तियार नहीं [169]; पाक है अल्लाह और बहुत बुलंद है उस शिर्क से जो ये करते हैं!"

[168] पैदाइश और इंतख़ाब में अल्लाह का कुल्ली इख़्तियार

यह आयत वलीद बिन मुग़ीरा जैसे मुशरिकीन के इस एतराज़ के रद्द में नाज़िल हुई जो कहते थे कि नबुव्वत मक्का या ताइफ़ के किसी मालदार रईस को क्यों न मिली! अल्लाह ने फ़रमाया कि किसी को पैदा करना और किसी मन्सब के लिए चुनना महज़ अल्लाह की मशिय्यत है, किसी मख़लूक़ को इसमें दख़ल का कोई हक़ नहीं।

[169] नबुव्वत वहबी है, कस्बी नहीं

नबुव्वत अल्लाह का ख़ास अतीया है जिसे वह अपनी हिकमत से सिर्फ़ उसी को अता फ़रमाता है जिसे चाहता है। बंदों को इसमें कोई राय या इख़्तियार नहीं दिया गया।

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