कुरान - 28:70 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
وَهُوَ ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ لَهُ ٱلۡحَمۡدُ فِي ٱلۡأُولَىٰ وَٱلۡأٓخِرَةِۖ وَلَهُ ٱلۡحُكۡمُ وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Wa Huwal laahu laaa ilaaha illaa Huwa lahul hamdu fil oolaa wal Aakhirati wa lahul hukmu wa ilaihi turja'oon)

और वही अल्लाह है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं; उसी के लिए तमाम तारीफ़ है पहली (दुनिया) में और पिछली (आख़िरत) में [171]; और उसी का हुक्म (फ़रमान) है [172] और उसी की तरफ़ तुम सब लौटाए जाओगे [173]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 70

"और वही अल्लाह है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं; उसी के लिए तमाम तारीफ़ है पहली (दुनिया) में और पिछली (आख़िरत) में [171]; और उसी का हुक्म (फ़रमान) है [172] और उसी की तरफ़ तुम सब लौटाए जाओगे [173]।"

[171] दुनिया और आख़िरत में हम्द

दुनिया में तमाम नेमतों और हिदायत पर अल्लाह की हम्द की जाती है, और आख़िरत में जन्नत की हमेशा रहने वाली दौलत और रज़ा पर अहले ईमान उसकी हम्द व सना करेंगे।

[172] मुतलक़ हुकूमत और फ़रमानरवाई

कायनात के हर ज़र्रे पर सिर्फ़ अल्लाह का हुक्म और फ़ैसला नाफ़िज़ है, कोई उसके फ़ैसले को टाल नहीं सकता।

[173] रुजूअ-ए-इलाही

आख़िरकार तमाम मख़लूक़ को अपने आमाल का हिसाब देने के लिए उसी की बारगाह में हाज़िर होना है।

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