कुरान - 28:72 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

72
قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِن جَعَلَ ٱللَّهُ عَلَيۡكُمُ ٱلنَّهَارَ سَرۡمَدًا إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ مَنۡ إِلَٰهٌ غَيۡرُ ٱللَّهِ يَأۡتِيكُم بِلَيۡلٖ تَسۡكُنُونَ فِيهِۚ أَفَلَا تُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Qul ara'aitum in ja'alal laahu 'alaikumun nahaara sarmadan ilaa Yawmil Qiyaamati man ilaahun ghairul laahi yaateekum bilailin taskunoona feehi afalaa tubsiroon)

आप कह दीजिए, 'भला बताओ तो अगर अल्लाह क़यामत के दिन तक तुम पर हमेशा का दिन कर दे [177], तो अल्लाह के सिवा कौन सा ऐसा माबूद है जो तुम्हारे लिए रात ले आए जिसमें तुम सुकून पाओ? तो क्या तुम देखते नहीं [178]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 72 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 72

"आप कह दीजिए, 'भला बताओ तो अगर अल्लाह क़यामत के दिन तक तुम पर हमेशा का दिन कर दे [177], तो अल्लाह के सिवा कौन सा ऐसा माबूद है जो तुम्हारे लिए रात ले आए जिसमें तुम सुकून पाओ? तो क्या तुम देखते नहीं [178]?'"

[177] दायमी दिन का तसव्वुर

अगर हमेशा सूरज चमकता रहे और कभी रात न आए, तो गर्मी, थकान और बे-ख़्वाबी से इंसान और तमाम जानवर हलाक हो जाएं और ज़िंदगी मुहाल हो जाए।

[178] रात के सुकून की क़द्र

अल्लाह ने रात को सुकून और आराम का ज़रीआ बनाया। फ़रमाया: क्या तुम अपनी आँखों से कुदरत की इस अज़ीम नेमत को नहीं देखते!

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