Transliteration: (Wa laa tad'u ma'al laahi ilaahan aakhar; laaa ilaaha illaa Hoo; kullu shai'in haalikun illaa Wajhah; lahul hukkmu wa ilaihi turja'oon (section 9))
"और अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद की इबादत न कीजिए [219]; उसके सिवा कोई माबूद नहीं; हर चीज़ हलाक (फ़ना) होने वाली है सिवाय उसकी ज़ात-ए-करीम के [220]; उसी का फ़रमान (हुक्म) है और उसी की तरफ़ तुम सब पलटाए जाओगे [221]।"
सूरह की इख़्तितामी आयत में तौहीद का साफ़ ऐलान फ़रमाया कि इबादत का मुस्तहिक़ सिर्फ़ अल्लाह है, तमाम माबूदान-ए-बातिल फ़ना होने वाले हैं।
कायनात की हर चीज़—आसमान, ज़मीन, इंसान, फ़रिश्ते—फ़ना होने वाली है। सिर्फ़ अल्लाह तआला की पाक ज़ात-ए-अक़दस हमेशा बाक़ी रहने वाली है। उसके करम और वज्ह-ए-करीम के सिवा कोई वजूद दायमी नहीं।
अज़ल से अबद तक हुक्म और फ़रमानरवाई सिर्फ़ अल्लाह की है, और आख़िरकार तुम सब उसी की अदालत में हिसाब के लिए पेश किए जाओगे।
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