Transliteration: (Innal lazee farada 'alaikal Qur-aana laraaadduka ilaa ma'aad; qur Rabbeee a'lamu man jaaa'a bil hudaa wa man huwa fee dalaalim mubeen)
"बेशक जिसने आप पर क़ुरआन (के अहकाम) फ़र्ज़ किए हैं, वह आपको ज़रूर वापसी की जगह (मक्का) की तरफ़ लौटाने वाला है [211], [212]; आप कह दीजिए, 'मेरा रब ख़ूब जानता है उसे जो हिदायत लेकर आया है और उसे जो खुली गुमराही में है [213]।'"
यह आयत मुक़द्दसा मक़ाम-ए-जहफ़ा में उस वक़्त नाज़िल हुई जब हुज़ूर अकरम ﷺ मक्का से मदीना हिजरत फ़रमा रहे थे और वतन की जुदाई पर रंजीदा थे। अल्लाह ने तसल्ली दी कि ऐ महबूब! जिसने आप पर क़ुरआन की तबलीग़ फ़र्ज़ की है, वह आपको फ़तह व कामरानी के साथ दोबारा मक्का लौटाएगा। चुनांचे आठ साल बाद फ़तहे मक्का के रोज़ यह वादा पूरा हुआ।
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी फ़रमाते हैं कि जो शख़्स सफ़र पर रवाना होते वक़्त इस आयत को पढ़ेगा, अल्लाह के फ़ज़्ल से सहीह-ओ-सलीमत अपने घर वापस लौटेगा।
काफ़िर हुज़ूर ﷺ को (मआज़अल्लाह) गुमराह कहते थे। अल्लाह ने फ़रमाया कि मेरा रब ख़ूब जानता है कि कौन हिदायत पर है और कौन खुली गुमराही में मुब्तला है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat