कुरान - 28:84 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

84
مَن جَآءَ بِٱلۡحَسَنَةِ فَلَهُۥ خَيۡرٞ مِّنۡهَاۖ وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَلَا يُجۡزَى ٱلَّذِينَ عَمِلُواْ ٱلسَّيِّـَٔاتِ إِلَّا مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Man jaaa'a bilhasanati falahoo khairum minhaa wa man jaaa'a bissaiyi'ati falaa yujzal lazeena 'amilus saiyiaati illaa maa kaanoo ya'maloon)

जो कोई नेकी लेकर आएगा उसके लिए उससे बेहतर सिला होगा [209]; और जो बुराई लेकर आएगा, तो बुराई करने वालों को बस उतना ही बदला दिया जाएगा जितना वे करते थे [210]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 84 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 84

"जो कोई नेकी लेकर आएगा उसके लिए उससे बेहतर सिला होगा [209]; और जो बुराई लेकर आएगा, तो बुराई करने वालों को बस उतना ही बदला दिया जाएगा जितना वे करते थे [210]।"

[209] नेकी का कई गुना सवाब

अल्लाह तआला अपने फ़ज़्ल से एक नेकी का बदला दस गुना से लेकर बे-हिसाब अता फ़रमाता है। इसमें ईमान और इख़्लास बुनियादी शर्त है।

[210] अद्ल व इंसाफ़ का मेयार

गुनाह का बदला सिर्फ़ उतना ही दिया जाएगा जितना जुर्म किया था; ज़रा बराबर भी ज़्यादती न होगी। यह अल्लाह का कमाल-ए-अद्ल है।

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