कुरान - 28:83 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

83
تِلۡكَ ٱلدَّارُ ٱلۡأٓخِرَةُ نَجۡعَلُهَا لِلَّذِينَ لَا يُرِيدُونَ عُلُوّٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فَسَادٗاۚ وَٱلۡعَٰقِبَةُ لِلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Tilkad Daarul Aakhiratu naj'aluhaa lillazeena laa yureedoona 'uluwwan fil ardi wa laa fasaadaa; wal 'aaqibatu lilmuttaqeen)

यह आख़िरत का घर, हम इसे उन लोगों के लिए ख़ास करते हैं जो ज़मीन में न अपनी बड़ाई (तकब्बुर) चाहते हैं और न फ़साद [206], [207]; और अच्छा अंजाम परहेज़गारों (मुत्तक़ियों) ही के लिए है [208]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 83 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 83

"यह आख़िरत का घर, हम इसे उन लोगों के लिए ख़ास करते हैं जो ज़मीन में न अपनी बड़ाई (तकब्बुर) चाहते हैं और न फ़साद [206], [207]; और अच्छा अंजाम परहेज़गारों (मुत्तक़ियों) ही के लिए है [208]।"

[206] आख़िरत का घर किसके लिए?

जन्नत की दायमी नेमतें सिर्फ़ उन मुख़्लिस बंदों के लिए हैं जो दुनिया में आजिज़ी और सादगी से रहे, जिन्होंने कभी अपनी अना या बड़ाई का मुज़ाहरा नहीं किया।

[207] फ़साद से परहेज़

जो ज़ुल्म, फ़साद और गुनाहों से दूर रहे और अमन व सलामती के पैग़ाम को अपनाया।

[208] मुत्तक़ियों का अच्छा अंजाम

दुनिया में चाहे ज़ालिमों को चंद रोज़ा चमक-दमक मिल जाए, मगर हक़ीक़ी और हमेशा की फ़तह सिर्फ़ अल्लाह से डरने वाले मुत्तक़ियों ही की है।

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