Transliteration: (Tilkad Daarul Aakhiratu naj'aluhaa lillazeena laa yureedoona 'uluwwan fil ardi wa laa fasaadaa; wal 'aaqibatu lilmuttaqeen)
"यह आख़िरत का घर, हम इसे उन लोगों के लिए ख़ास करते हैं जो ज़मीन में न अपनी बड़ाई (तकब्बुर) चाहते हैं और न फ़साद [206], [207]; और अच्छा अंजाम परहेज़गारों (मुत्तक़ियों) ही के लिए है [208]।"
जन्नत की दायमी नेमतें सिर्फ़ उन मुख़्लिस बंदों के लिए हैं जो दुनिया में आजिज़ी और सादगी से रहे, जिन्होंने कभी अपनी अना या बड़ाई का मुज़ाहरा नहीं किया।
जो ज़ुल्म, फ़साद और गुनाहों से दूर रहे और अमन व सलामती के पैग़ाम को अपनाया।
दुनिया में चाहे ज़ालिमों को चंद रोज़ा चमक-दमक मिल जाए, मगर हक़ीक़ी और हमेशा की फ़तह सिर्फ़ अल्लाह से डरने वाले मुत्तक़ियों ही की है।
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