कुरान - 28:81 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

81
فَخَسَفۡنَا بِهِۦ وَبِدَارِهِ ٱلۡأَرۡضَ فَمَا كَانَ لَهُۥ مِن فِئَةٖ يَنصُرُونَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَمَا كَانَ مِنَ ٱلۡمُنتَصِرِينَ

Transliteration: (Fakhasafnaa bihee wa bidaarihil arda famaa kaana lahoo min fi'atiny yansuroo nahoo min doonil laahi wa maa kaana minal muntasireen)

तो हमने उसे और उसके महल को ज़मीन में धंसा दिया [202]; पस अल्लाह के सिवा उसके पास कोई ऐसी जमाअत न थी जो उसकी मदद करती, और न वह ख़ुद बदला ले सका। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 81 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 81

"तो हमने उसे और उसके महल को ज़मीन में धंसा दिया [202]; पस अल्लाह के सिवा उसके पास कोई ऐसी जमाअत न थी जो उसकी मदद करती, और न वह ख़ुद बदला ले सका।"

[202] क़ारून का ज़मीन में धंसना

जब क़ारून ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पर बोहतान लगाने की नापाक साज़िश रची, तो हज़रत मूसा ने अल्लाह की बारगाह में बद-दुआ फ़रमाई। ज़मीन फट गई और क़ारून अपने तमाम ख़ज़ानों, महलों और लश्करों समेत ज़मीन में धंस गया। रिवायत में आता है कि वह क़ियामत तक रोज़ाना एक क़द ज़मीन में धंसता चला जा रहा है। न उसकी फ़ौज उसे बचा सकी और न उसका माल काम आया।

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