Transliteration: (Fakharaja 'alaa qawmihee fee zeenatih; qaalal lazeena yureedoonal hayaatad dunyaa yaalaita lanaa misla maaa ootiya Qaaroonu innahoo lazoo hazzin 'azeem)
"फिर वह अपनी पूरी ज़ीनत व ठाट-बाट के साथ अपनी क़ौम के सामने निकला [196]। जो लोग दुनियावी ज़िंदगी के तालिब थे वे कहने लगे, 'काश! हमारे पास भी वैसा ही माल होता जैसा क़ारून को दिया गया है [197]; बेशक वह बड़े नसीब वाला है [198]!'"
क़ारून सुर्ख़ ज़र्क़-बर्क़ लिबास पहनकर, सोने-चाँदी से सजे घोड़ों और हज़ारों ख़ादिमों के जुलूस के साथ निकला ताकि अपनी दौलत की नुमाइश करके लोगों को मुतास्सिर करे।
कमज़ोर ईमान वाले और दुनिया के तलबगार उसकी शानो-शौकत देखकर ललचा उठे और तमन्ना करने लगे कि काश हमें भी ऐसी ही दौलत मिल जाती।
वे ज़ाहिरी दौलत को बड़ी क़िस्मत और कामरानी समझने लगे, हालांकि आख़िरत की नेमतों के मुक़ाबले में यह सब कुछ हेच था।
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