कुरान - 28:79 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوۡمِهِۦ فِي زِينَتِهِۦۖ قَالَ ٱلَّذِينَ يُرِيدُونَ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا يَٰلَيۡتَ لَنَا مِثۡلَ مَآ أُوتِيَ قَٰرُونُ إِنَّهُۥ لَذُو حَظٍّ عَظِيمٖ

Transliteration: (Fakharaja 'alaa qawmihee fee zeenatih; qaalal lazeena yureedoonal hayaatad dunyaa yaalaita lanaa misla maaa ootiya Qaaroonu innahoo lazoo hazzin 'azeem)

फिर वह अपनी पूरी ज़ीनत व ठाट-बाट के साथ अपनी क़ौम के सामने निकला [196]। जो लोग दुनियावी ज़िंदगी के तालिब थे वे कहने लगे, 'काश! हमारे पास भी वैसा ही माल होता जैसा क़ारून को दिया गया है [197]; बेशक वह बड़े नसीब वाला है [198]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 79

"फिर वह अपनी पूरी ज़ीनत व ठाट-बाट के साथ अपनी क़ौम के सामने निकला [196]। जो लोग दुनियावी ज़िंदगी के तालिब थे वे कहने लगे, 'काश! हमारे पास भी वैसा ही माल होता जैसा क़ारून को दिया गया है [197]; बेशक वह बड़े नसीब वाला है [198]!'"

[196] क़ारून का शाही जुलूस और नुमाइश

क़ारून सुर्ख़ ज़र्क़-बर्क़ लिबास पहनकर, सोने-चाँदी से सजे घोड़ों और हज़ारों ख़ादिमों के जुलूस के साथ निकला ताकि अपनी दौलत की नुमाइश करके लोगों को मुतास्सिर करे।

[197] दुनिया-परस्तों की हसरत

कमज़ोर ईमान वाले और दुनिया के तलबगार उसकी शानो-शौकत देखकर ललचा उठे और तमन्ना करने लगे कि काश हमें भी ऐसी ही दौलत मिल जाती।

[198] दौलत को क़िस्मत समझना

वे ज़ाहिरी दौलत को बड़ी क़िस्मत और कामरानी समझने लगे, हालांकि आख़िरत की नेमतों के मुक़ाबले में यह सब कुछ हेच था।

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