कुरान - 28:80 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

80
وَقَالَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ وَيۡلَكُمۡ ثَوَابُ ٱللَّهِ خَيۡرٞ لِّمَنۡ ءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحٗاۚ وَلَا يُلَقَّىٰهَآ إِلَّا ٱلصَّـٰبِرُونَ

Transliteration: (Wa qaalal lazeena ootul 'ilma wailakum sawaabul laahi khairul liman aamana wa 'amila saalihaa; wa laa yulaq qaahaaa illas saabiroon)

और जिन्हें इल्म दिया गया था उन्होंने कहा [199], 'अफ़सोस तुम पर! अल्लाह का सवाब उस शख़्स के लिए कहीं बेहतर है जो ईमान लाए और नेक अमल करे [200]; और यह (दौलत) सिर्फ़ सब्र करने वालों ही को मिलती है [201]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 80 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 80

"और जिन्हें इल्म दिया गया था उन्होंने कहा [199], 'अफ़सोस तुम पर! अल्लाह का सवाब उस शख़्स के लिए कहीं बेहतर है जो ईमान लाए और नेक अमल करे [200]; और यह (दौलत) सिर्फ़ सब्र करने वालों ही को मिलती है [201]।'"

[199] उलमा-ए-हक़ की हिदायत

बनी इसराईल के बा-अमल उलमा और सालेहीन ने लोगों को डांटा और दुनियावी लालच से रोका।

[200] आख़िरत का सवाब ही हक़ीक़ी दौलत

उन्होंने समझाया कि अल्लाह का सवाब और जन्नत ईमान वालों के लिए इस फ़ानी दुनिया के तमाम ख़ज़ानों से कहीं बेहतर और दायमी है।

[201] सब्र करने वालों का मक़ाम

यह समझ और आख़िरत की रफ़अत सिर्फ़ उन्हीं को मिलती है जो दुनियावी ख़्वाहिशात पर सब्र करते हैं और दीन पर क़ायम रहते हैं।

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