Transliteration: (Qaala innamaaa ootee tuhoo 'alaa 'ilmin 'indeee; awalam ya'lam annal laaha qad ahlaka min qablihee minal qurooni man huwa ashaddu minhu quwwatanw wa aksaru jam'aa; wa laa yus'alu 'an zunoobihimul mujrimoon)
"उसने कहा, 'यह सब तो मुझे उस इल्म (हुनर) की वजह से दिया गया है जो मेरे पास है [192]!' क्या वह नहीं जानता था कि अल्लाह ने उससे पहले ऐसी कई नस्लों को हलाक कर दिया [193] जो ताक़त में उससे कहीं ज़्यादा सख़्त और जमाअत (दौलत) के एतबार से उससे कहीं बढ़कर थीं [194]? और मुजरिमों से उनके गुनाहों के बारे में नहीं पूछा जाएगा [195]।"
क़ारून ने तकब्बुर से कहा कि यह दौलत मुझे किसी रब की अता से नहीं मिली, बल्कि यह मेरे अपने हुनर और इल्म (कीमियागिरी या तिजारत के हुनर) का नतीजा है। उसने ख़ालिक़ के एहसान को भूलकर अपनी अक़्ल का घमंड किया।
अल्लाह ने फ़रमाया कि क्या वह भूल गया कि इससे पहले क़ौमे आद और समूद जैसी कितनी ही ताक़तवर और मालदार क़ौमों को अल्लाह ने उनके तकब्बुर के बाइस तबाह कर दिया!
जब अल्लाह का अज़ाब आता है तो न जिस्मानी ताक़त काम आती है और न ख़ज़ाने और लश्कर बचा सकते हैं।
क़ियामत में उनके चेहरों की स्याही और सियाह आमाल ही उनके जुर्म की गवाही दे देंगे, उनसे पूछने की ज़रूरत न रहेगी बल्कि सीधे अज़ाब में डाल दिए जाएंगे।
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