कुरान - 28:76 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
۞إِنَّ قَٰرُونَ كَانَ مِن قَوۡمِ مُوسَىٰ فَبَغَىٰ عَلَيۡهِمۡۖ وَءَاتَيۡنَٰهُ مِنَ ٱلۡكُنُوزِ مَآ إِنَّ مَفَاتِحَهُۥ لَتَنُوٓأُ بِٱلۡعُصۡبَةِ أُوْلِي ٱلۡقُوَّةِ إِذۡ قَالَ لَهُۥ قَوۡمُهُۥ لَا تَفۡرَحۡۖ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡفَرِحِينَ

Transliteration: (Inna Qaaroona kaana min qawmi Moosaa fabaghaaa 'alaihim wa aatainaahu minal kunoozi maaa inna mafaati hahoo latanooo'u bil'usbati ulil quwwati iz qaala lahoo qawmuhoo laa tafrah innal laahaa laa yuhibbul fariheen)

बेशक क़ारून मूसा की क़ौम (बनी इसराईल) में से था [184], फिर उसने उन पर सरकशी की [185]; और हमने उसे इतने ख़ज़ाने दिए थे कि बेशक उनकी कुंजियाँ ताक़तवर लोगों की एक जमाअत पर भी भारी थीं [186]। जब उसकी क़ौम ने उससे कहा, 'इतरा मत [187]! बेशक अल्लाह इतराने वालों को पसंद नहीं फ़रमाता; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 76

"बेशक क़ारून मूसा की क़ौम (बनी इसराईल) में से था [184], फिर उसने उन पर सरकशी की [185]; और हमने उसे इतने ख़ज़ाने दिए थे कि बेशक उनकी कुंजियाँ ताक़तवर लोगों की एक जमाअत पर भी भारी थीं [186]। जब उसकी क़ौम ने उससे कहा, 'इतरा मत [187]! बेशक अल्लाह इतराने वालों को पसंद नहीं फ़रमाता;"

[184] क़ारून का नसब और हक़ीक़त

क़ारून हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का चचेरा भाई था। वह तौरात का बेहतरीन क़ारी और आलिम था, मगर दौलत के नशे ने उसे बर्बाद कर दिया।

[185] अपनी क़ौम पर ज़ुल्म व सरकशी

उसने फ़िरऔन का साथ देकर अपनी ही मज़लूम इसराईली क़ौम पर ज़ुल्म ढाए और तकब्बुर का इज़हार किया।

[186] बे-हिसाब ख़ज़ाने और उनकी भारी चाभियाँ

अल्लाह ने उसे इतना माल दिया था कि उसके ख़ज़ानों की चाभियों को उठाने के लिए साठ या सत्तर ताक़तवर ख़च्चर या पहलवानों की जमाअत दरकार होती थी (रूहुल बयान)।

[187] दौलत पर इतराने की मुमानअत

मोमिनीन ने उसे नसीहत की कि इस फ़ानी दौलत पर घमंड न कर, क्योंकि अल्लाह तकब्बुर करने और इतराने वालों को हरगिज़ पसंद नहीं करता।

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