कुरान - 28:82 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
وَأَصۡبَحَ ٱلَّذِينَ تَمَنَّوۡاْ مَكَانَهُۥ بِٱلۡأَمۡسِ يَقُولُونَ وَيۡكَأَنَّ ٱللَّهَ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ وَيَقۡدِرُۖ لَوۡلَآ أَن مَّنَّ ٱللَّهُ عَلَيۡنَا لَخَسَفَ بِنَاۖ وَيۡكَأَنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلۡكَٰفِرُونَ

Transliteration: (Wa asbahal lazeena tamannaw makaanahoo bil amsi yaqooloona waika annal laaha yabsutur rizqa limany ya shaaa'u min 'ibaadihee wa yaqdiru law laaa am mannal laahu 'alainaa lakhasafa binaa waika annahoo laa yuflihul kaafiroon (section 8))

और जो लोग कल उसके मर्तबे की तमन्ना कर रहे थे, वे सुबह होते ही कहने लगे, 'हाय अफ़सोस! अल्लाह ही अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा करता है और तंग करता है [203]; अगर अल्लाह हम पर एहसान न फ़रमाता तो हमें भी धंसा देता [204]; अरे सच है कि काफ़िर कभी कामयाब नहीं होते [205]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 82

"और जो लोग कल उसके मर्तबे की तमन्ना कर रहे थे, वे सुबह होते ही कहने लगे, 'हाय अफ़सोस! अल्लाह ही अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा करता है और तंग करता है [203]; अगर अल्लाह हम पर एहसान न फ़रमाता तो हमें भी धंसा देता [204]; अरे सच है कि काफ़िर कभी कामयाब नहीं होते [205]!'"

[203] तमन्ना करने वालों की आँखें खुलना

अगले ही दिन जब लोगों ने देखा कि क़ारून का नामोनिशान मिट गया, तो वे अपने कल के ख़्याल पर शर्मिंदा हुए और अल्लाह का शुक्र अदा करने लगे।

[204] अल्लाह के एहसान का एतराफ़

वे कहने लगे कि अगर अल्लाह हम पर रहम न फ़रमाता और हमें ऐसी दौलत दे देता तो हम भी आज उसी की तरह ज़मीन में धंसा दिए जाते!

[205] काफ़िरों की हक़ीक़ी नाकामी

वे समझ गए कि दुनिया की आरज़ी दौलत कामयाबी का मेयार नहीं, काफ़िर और सरकश आख़िरकार बर्बाद ही होते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now