Transliteration: (Wa asbahal lazeena tamannaw makaanahoo bil amsi yaqooloona waika annal laaha yabsutur rizqa limany ya shaaa'u min 'ibaadihee wa yaqdiru law laaa am mannal laahu 'alainaa lakhasafa binaa waika annahoo laa yuflihul kaafiroon (section 8))
"और जो लोग कल उसके मर्तबे की तमन्ना कर रहे थे, वे सुबह होते ही कहने लगे, 'हाय अफ़सोस! अल्लाह ही अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा करता है और तंग करता है [203]; अगर अल्लाह हम पर एहसान न फ़रमाता तो हमें भी धंसा देता [204]; अरे सच है कि काफ़िर कभी कामयाब नहीं होते [205]!'"
अगले ही दिन जब लोगों ने देखा कि क़ारून का नामोनिशान मिट गया, तो वे अपने कल के ख़्याल पर शर्मिंदा हुए और अल्लाह का शुक्र अदा करने लगे।
वे कहने लगे कि अगर अल्लाह हम पर रहम न फ़रमाता और हमें ऐसी दौलत दे देता तो हम भी आज उसी की तरह ज़मीन में धंसा दिए जाते!
वे समझ गए कि दुनिया की आरज़ी दौलत कामयाबी का मेयार नहीं, काफ़िर और सरकश आख़िरकार बर्बाद ही होते हैं।
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