कुरान - 28:86 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

86
وَمَا كُنتَ تَرۡجُوٓاْ أَن يُلۡقَىٰٓ إِلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبُ إِلَّا رَحۡمَةٗ مِّن رَّبِّكَۖ فَلَا تَكُونَنَّ ظَهِيرٗا لِّلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa maa kunta tarjooo ai yulqaaa ilaikal Kitaabu illaa rahmatan mir Rabbika falaa takoonanna zaheeral lil kaafireen)

और आप को यह उम्मीद न थी कि आप पर किताब उतारी जाएगी, यह तो सिर्फ़ आपके रब की रहमत है [214]; पस आप हरगिज़ काफ़िरों के मददगार न बनिए [215]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 86 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 86

"और आप को यह उम्मीद न थी कि आप पर किताब उतारी जाएगी, यह तो सिर्फ़ आपके रब की रहमत है [214]; पस आप हरगिज़ काफ़िरों के मददगार न बनिए [215];"

[214] नबुव्वत व क़ुरआन महज़ अल्लाह की रहमत

यानी ज़ाहिरी अस्बाब के तहत आपको यह ख़्याल न था कि आप पर क़ुरआन जैसी अज़ीम किताब नाज़िल होगी, बल्कि यह अल्लाह तआला का ख़ास फ़ज़्ल और आलमीन के लिए रहमत है।

[215] काफ़िरों की मदद से परहेज़

ख़िताब अगरचे हुज़ूर ﷺ से है मगर हुक्म पूरी उम्मत के लिए है कि किसी भी मामले में काफ़िरों और बद-दीनों की हिमायत और मदद न की जाए।

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