Transliteration: (Wa mir rahmatihee ja'ala lakumul laila wannahaara litaskunoo feehi wa litabtaghoo min fadlihee wa la'allakum tashkuroon)
"और उसने अपनी रहमत से तुम्हारे लिए रात और दिन बनाए ताकि तुम उसमें (रात में) आराम पाओ [179] और (दिन में) उसका फ़ज़्ल (रिज़्क़) तलाश करो, और ताकि तुम शुक्र अदा करो [180]।"
अल्लाह तआला ने रात और दिन का ऐसा मुकम्मल निज़ाम बनाया कि रात में इंसान आराम करके अपनी खोई हुई ताक़त बहाल करे, और दिन के उजाले में हलाल रोज़ी कमाए।
यह सब कुछ इसलिए है ताकि इंसान इन नेमतों की क़द्र पहचाने और अपने ख़ालिक़ व मालिक का शुक्रगुज़ार बंदा बने।
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