कुरान - 28:71 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِن جَعَلَ ٱللَّهُ عَلَيۡكُمُ ٱلَّيۡلَ سَرۡمَدًا إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ مَنۡ إِلَٰهٌ غَيۡرُ ٱللَّهِ يَأۡتِيكُم بِضِيَآءٍۚ أَفَلَا تَسۡمَعُونَ

Transliteration: (Qul ara'aitum in ja'alal laahu 'alaikumul laila sarmadan ilaa Yawmil Qiyaamati man ilaahun ghairul laahi yaa teekum bidiyaaa'in afalaa tasma'oon)

आप फ़रमा दीजिए, 'भला देखो तो अगर अल्लाह क़यामत के दिन तक तुम पर हमेशा की रात कर दे [174], तो अल्लाह के सिवा कौन सा ऐसा माबूद है जो तुम्हारे पास रौशनी ले आए [175]? तो क्या तुम सुनते नहीं [176]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 71

"आप फ़रमा दीजिए, 'भला देखो तो अगर अल्लाह क़यामत के दिन तक तुम पर हमेशा की रात कर दे [174], तो अल्लाह के सिवा कौन सा ऐसा माबूद है जो तुम्हारे पास रौशनी ले आए [175]? तो क्या तुम सुनते नहीं [176]?'"

[174] दायमी रात का तसव्वुर

अल्लाह तआला इंसानों को ग़ौर करने की दावत देता है कि अगर सूरज का निकलना बंद हो जाए और कयामत तक हमेशा के लिए रात ही रात रहे, तो ज़िंदगी का क्या हाल होगा!

[175] बातिल माबूदों की आजिज़ियत

क्या तुम्हारे वे बुत या झूठे ख़ुदा सूरज को निकाल कर दिन की रौशनी ला सकते हैं? हरगिज़ नहीं! यह सिर्फ़ अल्लाह की कुदरत है।

[176] हक़ की दावत सुनना

फ़रमाया गया कि क्या तुम इस हक़ीक़त को कान खोलकर नहीं सुनते और नसीहत हासिल नहीं करते!

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