कुरान - 28:66 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
فَعَمِيَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلۡأَنۢبَآءُ يَوۡمَئِذٖ فَهُمۡ لَا يَتَسَآءَلُونَ

Transliteration: (Fa'amiyat 'alaihimul ambaaa'u Yawma'izin fahum laa yatasaaa'aloon)

तो उस दिन उन पर सारी बातें अंधी हो जाएंगी (कोई बात न सूझेगी) [166], फिर वे आपस में एक-दूसरे से पूछ भी न सकेंगे [167]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 66

"तो उस दिन उन पर सारी बातें अंधी हो जाएंगी (कोई बात न सूझेगी) [166], फिर वे आपस में एक-दूसरे से पूछ भी न सकेंगे [167]।"

[166] हैबत से होश उड़ जाना

अल्लाह की अदालत के रोब और खौफ़ से काफ़िरों की अक़्लें काम करना छोड़ देंगी और उन्हें अपने बचाव में कोई उज़्र या बहाना नहीं सूझेगा।

[167] आपस में मशविरा करने से लाचारी

वे इतने बदहवास होंगे कि आपस में एक-दूसरे से कोई बात या सलाह भी न कर सकेंगे और गूंगों की तरह ख़ामोश खड़े रहेंगे।

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