कुरान - 28:64 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
وَقِيلَ ٱدۡعُواْ شُرَكَآءَكُمۡ فَدَعَوۡهُمۡ فَلَمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَهُمۡ وَرَأَوُاْ ٱلۡعَذَابَۚ لَوۡ أَنَّهُمۡ كَانُواْ يَهۡتَدُونَ

Transliteration: (Wa qeelad 'oo shurakaaa'akum fada'awhum falam yastajeeboo lahum wa ra awul 'azaab; law annahum kaanoo yahtadoon)

और कहा जाएगा, 'अपने ठहराए हुए शरीकों को पुकारो!' तो वे उन्हें पुकारेंगे मगर वे उन्हें कोई जवाब न देंगे [164], और वे अज़ाब को (अपनी आँखों से) देख लेंगे; काश वे हिदायत पाने वाले होते! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 64

"और कहा जाएगा, 'अपने ठहराए हुए शरीकों को पुकारो!' तो वे उन्हें पुकारेंगे मगर वे उन्हें कोई जवाब न देंगे [164], और वे अज़ाब को (अपनी आँखों से) देख लेंगे; काश वे हिदायत पाने वाले होते!"

[164] झूठे माबूदों की बे-बसी

मुशरिकीन से कहा जाएगा कि अब अपने माबूदों को अपनी मदद के लिए पुकारो। वे उन्हें पुकारेंगे मगर बेजान बुत कोई जवाब न दे सकेंगे, और मुशरिकीन अपनी आँखों से जहन्नम का अज़ाब देखकर हसरत करेंगे कि काश वे दुनिया में ईमान ले आते!

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